बारह मुखी रुद्राक्ष (Twelve Faced Rudraksha)

बारह मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप है एवं इसके देवता बारह सूर्य है।है। द्वादशमुखीरुद्राक्षको धारण करने से दोनों लोको में सुख की प्राप्ति होती है, गौं हत्या मनुष्य हत्या व रत्नों की चोरी जैसे पापोंको नष्ट करता है।यह द्वादश आदित्य का स्वरूप माना जाता है। सूर्य स्वरूप होने से धारक को बलशाली, शक्तिमान तथा तेजस्वी बनाता है।ब्रह्मचर्य रक्षा, चेहरे का तेज और ओज बना रहता है। सभी प्रकार की मानसिक एवंशारीरिक पीड़ा मिट जाती है तथा ऐश्वर्ययुक्त सुखी जीवन की प्राप्ति होती है।यह सभी प्रकार की बाधाओं का कीलन करने वाला मनका ‘आदित्यरुद्राक्ष’ नाम से जाना जाता है।

बारहमुखी रुद्राक्ष का मंत्र: ऊं क्रौं क्षौं रौं सूर्य नम:

उपयोग से लाभ

  • बारह मुखी रुद्राक्षलक्ष्मी प्राप्ति में अत्यंत सहायक सिद्धहोता है।
  • द्वादशमुखी रुद्राक्ष - सभी प्रकार के अर्थ एवं सिद्धियों की पूर्ति करता है।
  • मान - प्रतिष्ठा और यश- कीर्तिबढ़ाने परम,शोहरत की प्राप्ति में सहायक होता हैI
  • यह रुद्राक्ष सभी प्रकार के भयानक पशुओं से रक्षा करता है एवंदरिद्रता को नष्ट करता है ।
  • इस रुद्राक्ष को दांतों की संख्या के बराबर की माला कंठ में धारण करने से मनुष्य एवं चोरी जैसे पाप तथा गौ-वध का पाप नष्ट करता है।
  • द्वादशमुखी रुद्राक्ष धारण करने से सभी प्रकार की बाधाएँ नष्ट होती हैं शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा से छुटकारा मिलता है।                       

द्वादशमुखी रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्यों के पाप नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि सूर्य आदि से लेकर संपूर्ण आदित्य द्वादशमुखी रुद्राक्ष में वास करते हैं। इस लिए इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले मनुष्यों को अग्नि और चोरका भय तथा अनेक प्रकार की व्याधि नहीं होती हैं और वे अर्थवान होते हैंI यदि दरिद्र भी हों तब भी भाग्यशाली हो जाते हैं हरिण, बिलाव, भैंसा, हाथी, घोड़ा, शूकर, कुत्ता, श्रृंगाल (सियार) अर्थात् दाढ़ वाले सभी प्रकार के पशु वगैरा उन मानवों को बाधा नहीं पहुंचा सकते।

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