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प्रसिद्ध ‘विवाह ज्योतिष’ विशेषज्ञ प्रख्यात ज्योतिषी श्रीमती अनीता बरनवाल ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचारपत्र नवभारत टाइम्स के लिए एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था "प्रेम विवाह की स्थिति में ग्रहों का विशेष महत्व नहीं", जो कि 17 नवंबर 2014 के एनबीटी अखबार में प्रकाशित किया गया था. यथार्थ में, हुआ यह था कि भारत की राजधानी दिल्ली में अचानक हुई एक दुर्घटना के कारण, जिसमें एक लड़की ने आत्महत्या कर ली थी, एवं अपुष्ट सूत्रों के अनुसार इस आत्महत्या के पीछे, एक ज्योतिषी द्वारा कुण्डली विश्लेषण के आधार पर उस बच्ची के प्रेम विवाह को नकारना था, अचानक ज्योतिष की नकारात्मक छवि को मीडिया में उछाला जाने लगा.

ज्योतिष जैसे गूढ़ बिषय को सही परिप्रेक्ष्य में न समझने वाले, एवं उसके प्रति पूर्वाग्रहग्रस्त तथाकथित बुद्धिजीवियों ने उसके खिलाफ जैसे मोर्चा ही खोल दिया. ऐसे समय में एस्ट्रोदेवम् डॉट कॉम/ AstroDevam.com के संरक्षक आचार्य कल्कि कृष्णन् एवं मुख्य ज्योतिषी श्रीमती अनिता बरनवाल ने राष्ट्रीय समाचारपत्र नवभारत टाइम्स के माध्यम से जवाब दिया.

इन दोनों प्रख्यात ज्योतिषीयों के लेखों को नवभारत टाइम्स ने उनके चित्रों के सहित अपने सम्पादकीय पृष्ठ पर छापा; जो कि अत्यंत प्रतिष्ठा का बिषय था.  आचार्य कल्कि कृष्णन् जी का लेख, आप हमारें एक पिछले ब्लॉग में पहले ही पढ़ चुके हैं, आज हम श्रीमती अनिता बरनवाल जी के लेख पर चर्चा करेंगे.

जैसा कि नवभारत टाइम्स के सम्पादकीय टीम ने हमें बताया, श्रीमती अनिता बरनवाल जी के लेख की सराहना अनेक पाठकों, और अनेकानेक ज्योतिषीयों, ने भी की. एक ज्योतिषी ने यह विचार व्यक्त किया कि, इस विद्वत्तापूर्ण लेख को हर ज्योतिष के विद्यार्थी को ध्यान से पढ़ना चाहिए. इस लेख के उच्चस्तर के कारण, इसे न केवल नवभारत टाइम्स के दिल्ली संस्करण, बल्कि पूरे देश के सभी संस्करणों के सम्पादकीय पृष्ठ पर सम्मानजनक स्थान मिला. इस अभूतपूर्व सम्मान के लिए पूरी एस्ट्रोदेवम् डॉट कॉम/ AstroDevam.com टीम अपने आपको सम्मानित महसूस करती हैं.

अपने पाठकों की सुविधा के लिए, हम इस लेख का असंपादित प्रारूप नीचे दे रहे हैं. आप इस पुरे लेख को पढ़े और देखे कि श्रीमती अनिता बरनवाल ने अपने लम्बे समय के अध्ययन में यह पाया है कि एक सफल विवाह मे कुंडलियो का क्या महत्व है; एवं प्रेम विवाह की स्थिति में कुण्डली व ज्योतिष की क्या भूमिका हैं. उल्लेखनीय हैं कि श्रीमती अनिता बरनवाल अनेक वर्षों से ‘विवाह ज्योतिष’ पर न केवल व्यवसायिक सलाह दे रही हैं, बल्कि इसका सफल अध्यापन भी कर रही हैं.

 

कुण्डली मिलान: कुछ बातें खरी-खरी

-अनिता बरनवाल

कुंडलियों का मिलान ज्योतिष का एक ऐसा लोकप्रिय बिषय हैं, जिसको बदलते परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करने की आवश्यकता समझी नहीं गई. इसलिए ऐसे बिषय पर नवभारत टाइम्स को इस चर्चा के लिए साधुवाद.

जिस समयखंड में ज्योतिषशास्त्र बना, तबसे समाज पूरा बदल चुका हैं, लेकिन दुर्भाग्य से बहुत कम ज्योतिषी इस बात को समझने को राजी हैं. पिछले कई वर्षों से वैवाहिक ज्योतिष का अध्यापन करने एवं ज्योतिष सलाह में सक्रिय रहते हुए यह बात न केवल मुझे, बल्कि सभी जिम्मेदार ज्योतिषीयों को कचोटती रहती हैं.

ऐसे में कुछ बाते हमसब समझ ले तो अच्छा.

सबसे पहली बात, आज जिस तरह से मानवमन पर व्यक्तिवाद हावी हो चुका हैं, एवं समायोजन की क्षमता कम होती जा रही हैं; ऐसे में कुण्डली मिलाते समय लड़के व लड़की, दोनों के मनमिजाज को समझना व विश्लेषित करना बहुत जरूरी हैं. यद्यपि ज्योतिषशास्त्र में ऋषियों ने इसके लिए आधारभूत सिद्धांत दिए हैं, लेकिन या तो ज्योतिषीयों की उस तरफ दृष्टि ही नहीं जाती; और, या फिर ज्यादातर के पास ऐसे बिश्लेषण की योग्यता ही नहीं हैं.

दूसरी बात, कुण्डली विश्लेषण करते समय, ज्योतिष के अन्य आधारभूत सिद्धांतों की अनदेखी करेंगे तो उल्टा पुल्टा निष्कर्ष निकलेंगा ही, और फिर इस विधा की हंसी भी उड़ेगी. सप्तम भावस्थ शनि वैवाहिक संबंधों में बाधा बताता हैं, लेकिन यही लोहे, तेल या लेबर सप्लाई का व्यवसाय भी बताता हैं. अगर सप्तम भाव के शनि वाला लड़का, पहले से ही लेबर सप्लाई कर रहा हैं तो सप्तम भाव के शनि का अर्थ तलाक ही न समझे. इस तरह के हजारों या फिर लाखों उदाहरण दिए जा सकते हैं, लेकिन मूल बात यह हैं कि जिन सज्जन के पास कुण्डली विश्लेषण के लिए गई हैं, वो खुद कितने पानी में हैं.

तीसरी बात, कुण्डली मिलाने वाले विद्वान की दृष्टि भावी वर वधू के सुखद दांपत्य जीवन पर हैं, या फिर मंगली दोष, कालसर्प दोष आदि बताकर जेब ढीली करने पर. अगर किसी डॉक्टर को पेटदर्द को पथरीजन्य पीड़ा बताकर ऑपरेशन करके आपसे पैसे ऐंठने ही हैं तो फिर आप बचेंगे कैसे? दुर्भाग्य से ज्योतिष के क्षेत्र में तुरत फुरत पैसे बनाकर रातोरात धनी बनने की आकांक्षा लेकर आने वालों की बहुतायत हो गई हैं. ये ठग इस विधा का नाम तो खराब कर ही रहे हैं, लेकिन भुगत तो सामान्य जनता ही रही हैं.

चौथी बात, जिसको जब मूर्धन्य ज्योतिषी ही नहीं समझते, तो फिर बेचारी आम जनता क्या समझेगी, कि कुण्डली अंतिम सत्य नहीं हैं. कुण्डली में स्थित ग्रहों का उतना ही महत्व हैं, जितना आपकी संभावित सड़क यात्रा में स्थित गड्ढों व स्पीड ब्रेकरों की स्थिति जानना. अब आप अपनी यात्रा में गड्ढों व स्पीड ब्रेकरों की स्थिति जानकर भी असावधान ड्राइविंग से अपनी गाड़ी तोड़ते हैं, या फिर इस ज्ञान का प्रयोग सुरक्षित यात्रा में करते हैं, यह आपके हाथ में हैं, न कि किसी ज्योतिषी के हाथ में.

पांचवी व सबसे महत्त्वपूर्ण बात; कि कुण्डली मिलाना एक ज्योतिषीय प्रक्रिया होने के साथ साथ एक काउंसलिंग या गहन परामर्श की भी प्रक्रिया हैं. यही कारण हैं कि मैं इस बात पर बहुत जोर देती हूँ कि कुण्डली मिलाते समय लड़का व लड़की दोनों उपस्थित हो, जिससे वे हर बात को गहनता से समझ सके. अपनी कई वर्षों की प्रोफेशनल प्रैक्टिश में मैंने पूर्ण निर्दोष मिलान तो आजतक देखा नहीं. ऐसे में जरूरत हैं, आगे आने वाले जीवन की भलाबुरा समझने की.

उदहारण के लिए, यदि लड़की की कुण्डली में द्वितीय भावके मंगल से मंगली दोष का सीधा मतलब हैं कि वह खरा बोलेंगी. ऐसे में यदि शादी के बाद लड़की बोलने में संयम बरते, व लड़का थोड़ा सहनशील हो जाये तो मंगली दोष समाप्त करने के लिए हजारों खर्च करने की जरूरत शायद ही पड़े. लेकिन ये बात बताये कौन, जब कुंए में ही भंग पडी हैं.

चलते चलते, मजे की बात कि ऋषियों का निर्देश हैं कि गन्धर्व विवाह (प्रेम विवाह) की स्थिति में, ग्रहों का उतना महत्व नहीं हैं, जितना सामान्य विवाह में. बस शर्त यह हैं कि प्रेम सच्चा होना चाहिए.

 

प्रेम विवाह की स्थिति में ग्रहों का विशेष महत्व नहीं /AstroDevam.com

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