ध्यान के विभिन्न प्रकार -Type of Meditation

आपने प्राणायाम और आसन के प्रकार जाने हैं, लेकिन ध्यान के प्रकार बहुत कम लोग ही जानते हैं। । ध्यान लगाने वाले केंद्र और ध्यान को उनके करने की विधि के अनुसार कई भागो में बांटा गया है जो निम्नलिखित है -  

  • श्रवण ध्यान (Listening / Nada Meditation ) :  इस ध्यान को सुन कर किया जाता है, ऐसे बहुत ही कम लोग है जो इस ध्यान को करके मोक्ष और सिद्धि की प्राप्ति कर पाते है । सुनना बहुत ही कठिन होता है, क्योकि इसमें व्यक्ति के मन के भटकने की अधिक से अधिक संभावनाएं होती है। इसमें आपको बाहरी नही किन्तु अपनी आतंरिक आवाजो को सुनना जरुरी है,  इस ध्यान की शुरुआत में आपको ये आवाजे बहुत आहिस्ता सुनाई देती है और धीरे-धीरे ये नाद में प्रवर्तित हो जाती है। एक दिन आपको “ॐ” स्वर सुनाई देने लगता है। “ॐ” मंत्र का जाप आप प्रायः पूजन करने वक़्त भी करते है।
  • भृकुटि ध्यान (Third Eye Meditation ) :  भृकुटि ध्यान को तीसरी आँख पर ध्यान केन्द्रित करने वाला ध्यान माना जाता है। इसके लिए मनुष्य को अपना सारा ध्यान अपने माथे की भौहो के बीच में लगाना होता है। इस ध्यान को करने के समय व्यक्ति को बाहर और अंदर पुर्णतः शांति का अनुभव होता है। इस ध्यान को करने से व्यक्ति की आत्मा को परमात्मा तक पहुँचाने का मार्ग भी दिखाई देता है । जब आप इस ध्यान को नियम के अनुसार करते हो तो ये ज्योति आपके सामने प्रकट होने लगती है,  शुरुआत में ये रोशनी अँधेरे में से निकलती है, जो कि फिर पीली हो जाती है, फिर सफ़ेद और नीली हो जाती है और आपको परमात्मा के पास ले जाती है ।
  • प्राणायाम ध्यान (Breath Focus Meditation ) : प्राणायाम ध्यान को व्यक्ति अपनी श्वास के माध्यम से करता है,  जिसमे इन्हें लम्बी और गहरी साँसों को लेना और छोड़ना पड़ता है । इन्हें अपने शरीर में आती हुई साँसों और जाती हुई साँसों के प्रति सजग भी रहना होता है । प्राणायाम ध्यान बहुत ही सरल माना जाता है किन्तु इसके अंतिम परिणाम बाकी ध्यान के जितने ही महत्व रखते है ।
  • मंत्र ध्यान (Mantra Meditation ) : इस ध्यान को अपनी आँखों को बंद करके ॐ मंत्र का जाप करना होता है और उसी पर व्यक्ति को ध्यान लगाना होता है। क्योकि मनुष्य के  शरीर का एक तत्व आकाश भी होता है तो व्यक्ति के अंदर ये मंत्र आकाश की भांति प्रसारित होता है और हमारे मन को शुद्ध और स्वच्छ करता है । जब तक हमारा मन हमे बांधे रखता है तब तक हम इस ध्वनि को बोल तो पाते है किन्तु सुन नही पाते लेकिन जब आपके अंदर से इस ध्वनि की साफ़ सुनाई देने लगती है तो समझ जाना चाहियें कि आपका मन शुद्ध हो चूका है । आप ॐ मंत्र के अलावा सोऽहम्, ॐ नमः शिवाय, ॐ, राम, यम् आदि मंत्र का भी उपयोग कर सकते हो । 
  • तंत्र ध्यान (Tantra Meditation ) :  इसमें मनुष्य को अपने मस्तिष्क के विचारों को सीमित रख कर, अपने अंदर के आध्यात्म पर ध्यान केन्द्रित करना होता हैI इसमें व्यक्ति की संकेंद्रण प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण होती है । इसमें व्यक्ति अपनी आँखों को बंद करके अपने हृदय चक्र से निकलने वाली ध्वनि पर ध्यान देता हैI व्यक्ति इसमें ख़ुशी और दुःख की भावनाओं, दोनों बातो का विश्लेषण करता है ।
  • योग ध्यान (Yoga Meditation ) : क्योकि योग का मतलब ही जोड़ होता है तो इसे करने का कोई एक तरीका नही होता बल्कि इस ध्यान को इनके करने की विधि के अनुसार कुछ अन्य ध्यानो में बांटा गया है. जो निम्नलिखित है -
  • चक्र ध्यान (Chakra Meditation ) :  व्यक्ति के शरीर में सात चक्र होते है,  इस ध्यान को करने का तात्पर्य उन्ही चक्रों पर ध्यान केन्द्रित करने से है । इन चक्रों को शरीर की उर्जा का गढ़ भी माना जाता है, इसको करने के लिए भी आँखों को बंद करके मंत्रो (लम, हम, राम, यम, आदि) का जाप करना होता है । इस ध्यान में अधिकतर हृदय चक्र पर ध्यान केन्द्रित करना होता है।
  • कुंडलिनी ध्यान (Kundalini Meditation ) :  इस ध्यान को सबसे मुश्किल ध्यान माना जाता है। इसमें मनुष्य को अपनी कुंडलिनी ऊर्जा को जगाना होता है, जो व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में स्थित होती है, इसको करते वक़्त मनुष्य धीरे-धीरे अपने शरीर के सभी आध्यात्मिक केन्द्रों को खोलता है, और एक दिन मोक्ष को प्राप्त हो जाता है । इस ध्यान को करने के लिए आपको एक उचित गुरु की आवश्यकता होती है। 
  • दृष्टा ध्यान (Gazing meditation ) :  इस ध्यान को आँखों को खोल कर किया जाता है । इससे अर्थ ये है कि आप लगातार किसी चीज़ पर दृष्टि रख कर ध्यान करें। इस स्थिति में आपकी आँखों के सामने ढेर सारे तनाव, विचार और कल्पनायें आती है। इस ध्यान की मदद से आप बौधिक रूप से अपने वर्तमान को देख और समझ पाते हो ।
Type of Meditation

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